Javed Mohsin
Ek Mulaqaat
वाक़िफ़ नहीं है तू मुझसे, ओ, सनम
जितना दर्द दोगे, रहेगा उतना कम
जाने, हुई कैसे ये दूरियाँ
जितना तू तड़पे, उतना तड़पे हैं हम

ज़िंदा रहने के लिए, तेरी क़सम
ज़िंदा रहने के लिए, तेरी क़सम
एक मुलाक़ात ज़रूरी है, सनम
एक मुलाक़ात ज़रूरी है, सनम

इससे पहले के ये साँसें हो ख़तम
इससे पहले के ये साँसें हो ख़तम
एक मुलाक़ात ज़रूरी है, सनम
एक मुलाक़ात ज़रूरी है, सनम

"रब्बा", "रब्बा" करता है दर्द-दर्द
मेरा दुनिया क्यूँ ना समझे इश्क़-इश्क़
मेरा किसी को कभी ना मिले यारा से जुदाई

मेरा नहीं, मेरा नहीं वक़्त-वक़्त
मेरा टूटे नहीं, टूटे नहीं सब्र-सब्र
तेरा मरके भी करूँगा ना तुझसे बेवफ़ाई

वक़्त लगता है, ज़रा सी देर होती है
कभी तो सौ जनम भी कम पड़ जाते हैं
मैं समझती हूँ, मगर, ये दिल नहीं समझे
लहर से क्यूँ किनारे मिल ना पाते हैं
जाने, हुई कैसे ये दूरियाँ
जितना तू तड़पे, उतना तड़पे हैं हम

इससे पहले के मेरा टूटे भरम
इससे पहले के मेरा टूटे भरम
एक मुलाक़ात ज़रूरी है, सनम
एक मुलाक़ात ज़रूरी है, सनम

ज़िंदा रहने के लिए, तेरी क़सम
ज़िंदा रहने के लिए, तेरी क़सम
एक मुलाक़ात ज़रूरी है, सनम
एक मुलाक़ात ज़रूरी है, सनम

इश्क़ के दरिया में दिल, देखो, डूबा-डूबा जाए
हार गया जो ख़ुद से, वो फ़िर हार नहीं लग पाए
एक तरफ़ है सारी दुनिया, एक तरफ़ जानम है
छोड़ के सबकुछ इश्क़ निभाए, कैसा पागल-पन है

ना लैला ने, ना मजनूँ ने खेली ऐसी बाज़ी
रब नाराज़ है, लेकिन फिर भी दोनों के दिल राज़ी
रब नाराज़ है, लेकिन फिर भी दोनों के दिल राज़ी

एक मुलाक़ात ज़रूरी है, सनम
एक मुलाक़ात ज़रूरी है, सनम
एक मुलाक़ात ज़रूरी है, सनम
...ज़रूरी है, सनम
एक मुलाक़ात ज़रूरी है, सनम