Anuv Jain & AP Dhillon - Afsos (हिंदी अनुवाद)
[Verse 1: Anuv Jain]
हाँ, तेरी यादें
तेरी यादों को लेकर बैठा, कईं रातों तक
पर आज इन रातों के पीछे
मुझे सब कुछ दिख रहा है, कैसे बताऊँ?
[Verse 2: Anuv Jain]
जो गुरूर था, वो फ़िज़ूल था
मुझे आज पता लगा क्या कसूर था
मेरे दिल के नूर, मैं था मशहूर
तुझे कर दिया दूर, ओ बेकसूर
कैसे गैरों को मैं अपना माना
और अपनों को गैरों की तरह मिला
इसने तो तुम्हारा दिल तोड़ दिया होगा
[Pre-Chorus: Anuv Jain]
तो हाँ, मैंने दुनिया देखी
तेरे दिल को देख ना पाया, मैं बेवकूफ़ सा
मैं बहुत बड़े नामों की बातें करता था
अब मैं इधर अकेले मरे जा रहा हूँ
[Chorus: Anuv Jain]
अब क्यों अफ़सोस हो रहा है
अब क्या फायदा, जब मिलना ही नहीं अगर चाहूँ तो भी
मैं अब घड़ियों के हाथों को लेकर
कैसे मोडूँ मैं दिशा समय की और अपनी राहें
[Verse 3: AP Dhillon]
बस अगर मैंने तेरी बातों को चंद पलों के लिए सुन लिया होता
बस अगर मैंने तेरे साथ सारी रातें बिताई होती
बस अगर मैंने तेरे आँसू बारिश में देख लिए होते
बस अगर मैंने अपने जज़्बातों की बात कर ली होती
[Verse 4: AP Dhillon]
कैसी शाम थी, तेरे नाम थी
जो मैंने कभी नहीं पढ़ा क्या पैग़ाम था
मैं था हैरान, मैं था नादान
किस बात को लेकर मेरी जान थी परेशान
तुझे हंसता हुआ देखकर बार-बार
तुझे मैने कभी नहीं पूछा तेरे क्या थे हाल
तेरा सब्र मेरी समझ से बार
कि कैसे दिन तूने जाते मुझे हारते हुए
[Pre-Chorus: AP Dhillon & Anuv Jain]
हाँ, जो प्यार था तेरा
थोड़ा भी समझ ना पाया, मैं बेवकूफ़ सा
हाँ, यह दिल पछताए
तेरे बिना अब रह भी ना पाए, यह अकेले
[Chorus: Anuv Jain]
अब क्यों अफ़सोस हो रहा है
अब क्या फायदा, जब मिलना ही नहीं अगर चाहूँ तो भी
मैं अब घड़ियों के हाथों को लेकर
कैसे मोडूँ मैं दिशा समय की और अपनी राहें
[Outro: AP Dhillon]
और अपनी राहें
और अपनी राहें
हाँ, तेरी यादें
तेरी यादों को लेकर बैठा, कईं रातों तक
पर आज इन रातों के पीछे
मुझे सब कुछ दिख रहा है, कैसे बताऊँ?
[Verse 2: Anuv Jain]
जो गुरूर था, वो फ़िज़ूल था
मुझे आज पता लगा क्या कसूर था
मेरे दिल के नूर, मैं था मशहूर
तुझे कर दिया दूर, ओ बेकसूर
कैसे गैरों को मैं अपना माना
और अपनों को गैरों की तरह मिला
इसने तो तुम्हारा दिल तोड़ दिया होगा
[Pre-Chorus: Anuv Jain]
तो हाँ, मैंने दुनिया देखी
तेरे दिल को देख ना पाया, मैं बेवकूफ़ सा
मैं बहुत बड़े नामों की बातें करता था
अब मैं इधर अकेले मरे जा रहा हूँ
[Chorus: Anuv Jain]
अब क्यों अफ़सोस हो रहा है
अब क्या फायदा, जब मिलना ही नहीं अगर चाहूँ तो भी
मैं अब घड़ियों के हाथों को लेकर
कैसे मोडूँ मैं दिशा समय की और अपनी राहें
[Verse 3: AP Dhillon]
बस अगर मैंने तेरी बातों को चंद पलों के लिए सुन लिया होता
बस अगर मैंने तेरे साथ सारी रातें बिताई होती
बस अगर मैंने तेरे आँसू बारिश में देख लिए होते
बस अगर मैंने अपने जज़्बातों की बात कर ली होती
[Verse 4: AP Dhillon]
कैसी शाम थी, तेरे नाम थी
जो मैंने कभी नहीं पढ़ा क्या पैग़ाम था
मैं था हैरान, मैं था नादान
किस बात को लेकर मेरी जान थी परेशान
तुझे हंसता हुआ देखकर बार-बार
तुझे मैने कभी नहीं पूछा तेरे क्या थे हाल
तेरा सब्र मेरी समझ से बार
कि कैसे दिन तूने जाते मुझे हारते हुए
[Pre-Chorus: AP Dhillon & Anuv Jain]
हाँ, जो प्यार था तेरा
थोड़ा भी समझ ना पाया, मैं बेवकूफ़ सा
हाँ, यह दिल पछताए
तेरे बिना अब रह भी ना पाए, यह अकेले
[Chorus: Anuv Jain]
अब क्यों अफ़सोस हो रहा है
अब क्या फायदा, जब मिलना ही नहीं अगर चाहूँ तो भी
मैं अब घड़ियों के हाथों को लेकर
कैसे मोडूँ मैं दिशा समय की और अपनी राहें
[Outro: AP Dhillon]
और अपनी राहें
और अपनी राहें