[Raghav Chaitanya & Neeti Mohan "Das Haasil Sau Baaki" के बोल]
[Verse 1: Raghav Chaitanya]
आँखें लगी, ख़्वाब आया
आँखें खुलीं, घबराया
कुछ खट्टा, कुछ मीठा
कोई राज़ी, कोई रूठा
दस हासिल, सौ बाकी
ये मंज़िल ना काफ़ी
इस पल ये, उस पल वो
कुछ बिखरा, कुछ टूटा
[Chorus: Raghav Chaitanya]
सब कुछ मिला है, कुछ ना गिला है
फिर भी यक़ीनन दिल में तड़पती ख़ला है
ग़ज़ब मरहला है
क्या ताना-बाना, समझा ना जाना
अक्सर अमूमन चढ़ते ही सूरज ढला है
ग़ज़ब मरहला है
[Post-Chorus: Raghav Chaitanya]
प, प-र-र-र-र, प-र-र-र-र
प-र-र-र-र-र-रा-नि
र, प-र-र-र-र, प-र-र-र-र
प-र-र-र-र-र-रा-नि
र, प-र-र-र-र, प-र-र-र-र (कुछ खट्टा, कुछ मीठा)
प-र-र-र-र-र-रा-नि (कुछ खट्टा, कुछ मीठा)
र, प-र-र-र-र, प-र-र-र-र (कुछ खट्टा, कुछ मीठा)
प-र-र-र-र-र-रा-नि (कुछ खट्टा, कुछ मीठा)
र, प-र-र-र-र, प-र-र-र-र
प-र-र-र-र-र-रा-नि
र, प-र-र-र-र, प-र-र-र-र
प-र-र-र-र-र-रा-नि
र, प-र-र-र-र, प-र-र-र-र (कुछ खट्टा, कुछ मीठा)
प-र-र-र-र-र-रा-नि (कुछ खट्टा, कुछ मीठा)
र, प-र-र-र-र, प-र-र-र-र (कुछ खट्टा, कुछ मीठा)
प-र-र-र-र-र-रा-नि (कुछ खट्टा, कुछ मीठा)
[Verse 2: Neeti Mohan & Raghav Chaitanya]
है फ़ितरत रंगों की रूमानी सी
है रंग तो कहानी भी है
लहर आनी-जानी, [?] अकीदत लफ़ानी सी है
कहीं तू, कहीं मैं, कहीं दिल
उलझन पुरानी सी है
ज़मीं आसमाँ ये जहाँ भी हैं मिलते
जगह वो रूहानी सी है
[Chorus: Raghav Chaitanya & Neeti Mohan]
ये सक्के, ये चक्कर, ये है नून-शक्कर
ग़ोया मिज़ाजन ख़ुद ही मिटा फ़ासला है
हसीं मरहला है
ये जीवन का पहिया, है फिर घूमे भैय्या
मसलन उसूलन रुकने से चलना भला है
हसीं मरहला है
[Post-Chorus: Raghav Chaitanya]
प, प-र-र-र-र, प-र-र-र-र
प-र-र-र-र-र-रा-नि
र, प-र-र-र-र, प-र-र-र-र
प-र-र-र-र-र-रा-नि
र, प-र-र-र-र, प-र-र-र-र (कुछ खट्टा, कुछ मीठा)
प-र-र-र-र-र-रा-नि (कुछ खट्टा, कुछ मीठा)
र, प-र-र-र-र, प-र-र-र-र (कुछ खट्टा, कुछ मीठा)
प-र-र-र-र-र-रा-नि (कुछ खट्टा, कुछ मीठा)
[Verse 3: Raghav Chaitanya & Neeti Mohan]
आँखें लगी, ख़्वाब आया
आँखें खुलीं, घबराया
कुछ खट्टा, कुछ मीठा
कोई राज़ी, कोई रूठा
दस हासिल, सौ बाकी
ये मंज़िल ना काफ़ी
इस पल ये, उस पल वो
कुछ बिखरा, कुछ टूटा
[Chorus: Raghav Chaitanya]
सब कुछ मिला है, कुछ ना गिला है
फिर भी यक़ीनन दिल में तड़पती ख़ला है
ग़ज़ब मरहला है
क्या ताना-बाना, समझा ना जाना
अक्सर अमूमन चढ़ते ही सूरज ढला है
ग़ज़ब मरहला है
[Outro: Raghav Chaitanya]
प, प-र-र-र-र, प-र-र-र-र
प-र-र-र-र-र-रा-नि
र, प-र-र-र-र, प-र-र-र-र
प-र-र-र-र-र-रा-नि
र, प-र-र-र-र, प-र-र-र-र (कुछ खट्टा, कुछ मीठा)
प-र-र-र-र-र-रा-नि (कुछ खट्टा, कुछ मीठा)
र, प-र-र-र-र, प-र-र-र-र (कुछ खट्टा, कुछ मीठा)
प-र-र-र-र-र-रा-नि (कुछ खट्टा, कुछ मीठा)
र, प-र-र-र-र, प-र-र-र-र
प-र-र-र-र-र-रा-नि
र, प-र-र-र-र, प-र-र-र-र
प-र-र-र-र-र-रा-नि
र, प-र-र-र-र, प-र-र-र-र (कुछ खट्टा, कुछ मीठा)
प-र-र-र-र-र-रा-नि (कुछ खट्टा, कुछ मीठा)
र, प-र-र-र-र, प-र-र-र-र (कुछ खट्टा, कुछ मीठा)
प-र-र-र-र-र-रा-नि (कुछ खट्टा, कुछ मीठा)