Taare
[Intro: Saswat Balan]
आ आ, दे रे ना, आ आ
हमारा ठोकरों से कुछ पुराना ख़ास नाता है
है जिसने इश्क़ ही देखा ना वो रब का दुलारा है
[Verse 1: Farak]
हमारा ठोकरों से कुछ पुराना ख़ास नाता है
हमारा ठोकरों से कुछ पुराना ख़ास नाता है
है जिसने इश्क़ ही देखा ना वो रब का दुलारा है
है जिसने इश्क़ ही देखा ना वो रब का दुलारा है
अब हाल-ए-दिल तो ना पूछो
बताते डर सा लगता है
इस खाली घर को ना लूटो
ये बुज़दिल सर पटकता है
वो घर छूटा है जब से
कमबख़्त कोई आसरा ना है
ये काग़ज़ काँपता जब होते दिल के घाव ताज़ा हैं
हो हो हो
[Verse 2: Saswat Balan, Farak]
के लफ़्ज़ कुछ ऐसे हैं
गँवाया इस क़दर के
गौर फ़रमाइएगा
गँवाया इस क़दर के
पाने को अब कुछ बचा ना है
वाह वाह
परिंदा क़ैद पिंजरे में
परिंदा क़ैद पिंजरे में
उसे डर आसमान का है
(वाह वाह)
गँवाया इस क़दर के पाने को अब कुछ बचा ना है (वाह वाह)
गँवाया इस क़दर के पाने को अब कुछ बचा ना है
परिंदा क़ैद पिंजरे में उसे डर आसमान का है
परिंदा क़ैद पिंजरे में उसे डर आसमान का है
जो बिखरा टूट के फिर वो
समेटे ना सिमटता है
हैं परतें इस क़दर दिल पे
तराशे ना निखरता है
हालातों से लिया जब बैर तो हर दाँव हारा मैं
ये कंधे झुक रहे हैं, उम्मीदों का भार ज़्यादा है
आ आ, दे रे ना, आ आ
हमारा ठोकरों से कुछ पुराना ख़ास नाता है
है जिसने इश्क़ ही देखा ना वो रब का दुलारा है
[Verse 1: Farak]
हमारा ठोकरों से कुछ पुराना ख़ास नाता है
हमारा ठोकरों से कुछ पुराना ख़ास नाता है
है जिसने इश्क़ ही देखा ना वो रब का दुलारा है
है जिसने इश्क़ ही देखा ना वो रब का दुलारा है
अब हाल-ए-दिल तो ना पूछो
बताते डर सा लगता है
इस खाली घर को ना लूटो
ये बुज़दिल सर पटकता है
वो घर छूटा है जब से
कमबख़्त कोई आसरा ना है
ये काग़ज़ काँपता जब होते दिल के घाव ताज़ा हैं
हो हो हो
[Verse 2: Saswat Balan, Farak]
के लफ़्ज़ कुछ ऐसे हैं
गँवाया इस क़दर के
गौर फ़रमाइएगा
गँवाया इस क़दर के
पाने को अब कुछ बचा ना है
वाह वाह
परिंदा क़ैद पिंजरे में
परिंदा क़ैद पिंजरे में
उसे डर आसमान का है
(वाह वाह)
गँवाया इस क़दर के पाने को अब कुछ बचा ना है (वाह वाह)
गँवाया इस क़दर के पाने को अब कुछ बचा ना है
परिंदा क़ैद पिंजरे में उसे डर आसमान का है
परिंदा क़ैद पिंजरे में उसे डर आसमान का है
जो बिखरा टूट के फिर वो
समेटे ना सिमटता है
हैं परतें इस क़दर दिल पे
तराशे ना निखरता है
हालातों से लिया जब बैर तो हर दाँव हारा मैं
ये कंधे झुक रहे हैं, उम्मीदों का भार ज़्यादा है